केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में कर्मचारियों के प्रतिनिधि समूह ‘नेशनल काउंसिल’ ने वेतन, इंक्रीमेंट, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन जैसे अहम मुद्दों पर सरकार को अपना विस्तृत मेमोरेंडम (ज्ञापन) सौंप दिया है। इस ज्ञापन में कर्मचारियों के हित में कई बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है।
आइए विस्तार से जानते हैं कि नेशनल काउंसिल ने सरकार के सामने कौन-सी प्रमुख मांगें रखी हैं और कर्मचारियों की सैलरी में कितना इजाफा होने की उम्मीद है।
1. बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) में भारी उछाल की मांग
नेशनल काउंसिल की सबसे बड़ी मांग कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को लेकर है। काउंसिल ने सरकार से मांग की है कि:
- फिटमेंट फैक्टर: इसे बढ़ाकर 3.83 कर दिया जाए।
- न्यूनतम वेतन (Minimum Salary): कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 69,000 रुपये प्रति माह किया जाए।इसका सीधा मतलब यह है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों के मूल वेतन में एक बड़ा और सम्मानजनक इजाफा किया जाए।
2. सालाना इंक्रीमेंट (Annual Increment) 6% करने का प्रस्ताव
वेतन वृद्धि की दर को लेकर भी ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई है। काउंसिल ने सरकार को सुझाव दिया है कि कर्मचारियों का सालाना इंक्रीमेंट रेट (Increment Rate) कम से कम 6 फीसदी तय किया जाए, ताकि हर साल उनके वेतन में एक मजबूत वृद्धि हो सके।
3. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
लाखों कर्मचारियों की सबसे पुरानी और अहम मांग को भी इस मेमोरेंडम में प्रमुखता से उठाया गया है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए सभी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन स्कीम (NPS) को हटाकर पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को दोबारा लागू किया जाए।
4. पेंशनर्स के लिए खास सुविधाएं और मेडिकल भत्ते
रिटायर हो चुके कर्मचारियों (पेंशनर्स) के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी कई सिफारिशें की गई हैं:
- पेंशन का रिवीजन: हर 5 साल में पेंशन की समीक्षा और उसमें बढ़ोतरी की जाए।
- मेडिकल अलाउंस: पेंशनर्स को मिलने वाले मेडिकल भत्ते को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
- CGHS सेंटर: स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए देश के हर जिले में कम से कम एक CGHS (Central Government Health Scheme) हेल्थ सेंटर खोला जाए।
- कम्यूटेड पेंशन: एडवांस में ली गई (कम्यूट की गई) पेंशन को बहाल करने की प्रक्रिया में सुधार हो।
सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं (CGHS) से जुड़ी इन मांगों को विचार के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया है, जबकि अन्य पेंशन मांगों को 8वें वेतन आयोग के पास भेजा जाएगा।
5. प्रमोशन, HRA और अन्य भत्तों पर अहम सुझाव
सैलरी और पेंशन के अलावा काउंसिल ने नौकरी की शर्तों और भत्तों में भी बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार की है:
- प्रमोशन पॉलिसी: किसी भी कर्मचारी को उसके 30 साल के सेवाकाल (Service Period) में कम से कम 5 बार प्रमोशन की गारंटी मिले।
- सैलरी लेवल: वर्तमान में मौजूद 18 सैलरी लेवल्स को घटाकर केवल 7 कर दिया जाए, ताकि वेतन विसंगतियां दूर हों।
- मैटरनिटी लीव: महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को बढ़ाकर 240 दिन किया जाए।
- HRA (हाउस रेंट अलाउंस): महंगाई भत्ते (DA) के साथ हाउस रेंट अलाउंस को मिलाकर 40% तक किया जाए।
आगे क्या होगा?
नेशनल काउंसिल ने कैबिनेट सचिव से अपील की है कि वे रेलवे, डिफेंस, पोस्टल और फाइनेंस जैसे अलग-अलग सेक्टर के कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। सरकार द्वारा वेतन आयोग का गठन किया जा चुका है और JCM (स्टाफ साइड) ने कमीशन के 18 सवालों के जवाब भी दे दिए हैं। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों पर टिकी हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
अगर नेशनल काउंसिल की ये सभी मांगें ज्यों की त्यों मान ली जाती हैं, तो यह केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक ऐतिहासिक सौगात होगी। न्यूनतम सैलरी 69 हजार होने और पुरानी पेंशन लागू होने से करोड़ों परिवारों का भविष्य आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा। 8वें वेतन आयोग (8th CPC Latest News) से जुड़े हर नए अपडेट के लिए नजर बनाए रखें!
