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होली पर चंद्र ग्रहण का साया, भारत में दिखेगा या नहीं holi chandragrahan 2026

holi chandragrahan 2026 इस साल होली का त्योहार एक खास खगोलीय घटना के साथ जुड़ गया है। 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन के दिन साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिससे धार्मिक नियम, सूतक काल और होली की पूजा-परंपराओं पर असर पड़ सकता है। लाखों लोग इस दुर्लभ संयोग को लेकर उत्सुक और चिंतित हैं।

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आइए विस्तार से समझते हैं चंद्र ग्रहण का समय, सूतक काल, होली पर प्रभाव, क्या करें-क्या न करें और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व।

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चंद्र ग्रहण 2026 का समय और अवधि (भारतीय समयानुसार)

  • ग्रहण शुरू: दोपहर 3:20 बजे
  • पूर्ण ग्रहण: शाम लगभग 5:04 बजे से शुरू (कुछ स्रोतों में 5:59 बजे)
  • ग्रहण समाप्त: शाम 6:46–6:47 बजे
  • भारत में दिखाई देने की अवधि: चंद्रोदय के बाद लगभग 20-25 मिनट तक (सूर्यास्त के आसपास)
  • विशेष: यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी/मघा नक्षत्र में लगेगा। चंद्रमा ‘ब्लड मून’ (लाल-तांबई रंग) का रूप ले सकता है।

यह ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका आदि में दिखेगा, लेकिन भारत में मुख्य रूप से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में पूर्ण, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक या पेनम्ब्रल।

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सूतक काल: कब लगेगा और कितनी देर रहेगा?

चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक नियम पूरी तरह लागू होंगे:

  • सामान्य लोगों के लिए सूतक: सुबह 9:39 बजे से शाम 6:46 बजे तक
  • वृद्ध, बच्चे, गर्भवती महिलाओं के लिए: दोपहर 3:28 बजे से शाम 6:46 बजे तक (कुछ पंचांगों में सुबह 6:20-6:23 बजे से शुरू)

सूतक में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन ग्रहण समाप्त होते ही सामान्य जीवन शुरू हो जाता है।

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होली और होलिका दहन पर क्या असर पड़ेगा?

  • होलिका दहन: अधिकांश पंचांगों के अनुसार 3 मार्च 2026 को ही रहेगा। शुभ मुहूर्त ग्रहण समाप्ति के बाद शाम 6:47 बजे से रात 8:50 बजे तक।
  • रंग वाली होली (धुलंडी): 4 मार्च 2026 को सामान्य रूप से मनाई जाएगी।
  • कुछ क्षेत्रों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर भारत) में स्थानीय पंचांग के आधार पर तिथि में थोड़ा अंतर संभव, लेकिन मुख्य रूप से कोई बड़ा बदलाव नहीं। ग्रहण शाम को होने से होलिका दहन ग्रहण के बाद ही होगा।

यह संयोग लगभग 100 वर्ष बाद हो रहा है, इसलिए धार्मिक महत्व बढ़ जाता है।

ज्योतिषीय प्रभाव और सावधानियां

ग्रहण के दौरान चंद्रमा (मन, भावनाएं) प्रभावित होता है, इसलिए:

  • मानसिक अशांति, भावनात्मक उतार-चढ़ाव, निर्णयों में भ्रम संभव।
  • कुछ राशियों (कन्या, सिंह आदि) पर अधिक प्रभाव, नकारात्मक बदलाव या चुनौतियां।
  • क्या न करें: ग्रहण के दौरान भोजन, पानी पीना, पूजा, शुभ कार्य, बाहर निकलना वर्जित।
  • क्या करें: घर में रहें, मंत्र जप (ॐ नमः शिवाय, चंद्र मंत्र), दान, ध्यान। ग्रहण के बाद स्नान कर शुद्धि करें।

वैज्ञानिक दृष्टि से यह प्राकृतिक घटना है – पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर चंद्रमा पर छाया डालती है।

होली मनाने के टिप्स इस ग्रहण वर्ष

  • होलिका दहन ग्रहण समाप्ति के बाद ही करें।
  • रंग खेलने से पहले स्नान और पूजा।
  • पर्यावरण-अनुकूल रंगों का उपयोग करें।
  • परिवार के साथ उत्सव मनाएं, लेकिन सूतक नियमों का सम्मान करें।

निष्कर्ष: होली 2026 न केवल रंगों का त्योहार, बल्कि खगोलीय और धार्मिक संयोग का भी प्रतीक बनेगा। सूतक और ग्रहण का ध्यान रखकर उत्सव मनाएं, ताकि बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश मजबूत हो।

अधिक जानकारी के लिए पंचांग या ज्योतिषी से सलाह लें।

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